भाग्य वृद्धि यंत्र क्या है?
“भाग्य वृद्धि यंत्र” संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है —
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भाग्य = किस्मत या सौभाग्य
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वृद्धि = वृद्धि या उन्नति
इस यंत्र को देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश और ग्रहों की अनुकूल ऊर्जा से सिद्ध किया जाता है ताकि व्यक्ति के जीवन में सौभाग्य, सफलता और मानसिक शांति आए। -
भाग्य वृद्धि यंत्र के लाभ:
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किस्मत मजबूत करता है – दुर्भाग्य को दूर कर भाग्य को सक्रिय करता है।
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धन और समृद्धि लाता है – व्यापार या नौकरी में सफलता देता है।
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रुके हुए कार्य पूरे करता है – जब कोई काम बार-बार रुक जाता है, तो यह यंत्र सहायक होता है।
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ग्रहदोष से मुक्ति – शनि, राहु, केतु आदि के प्रभाव को संतुलित करता है।
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आत्मविश्वास और सकारात्मकता बढ़ाता है।
कैसे स्थापित करें (सिद्धि विधि):
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दिन: शुक्रवार या रविवार को शुभ मुहूर्त में करें।
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स्थान: घर या ऑफिस के पूजा स्थान में रखें।
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सामग्री: स्वच्छ लाल कपड़ा, चंदन, धूप, दीप, फूल, और जल।
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विधि:
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स्नान के बाद शुद्ध होकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
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यंत्र को लाल कपड़े पर रखकर गंगाजल से शुद्ध करें।
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“ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्म्यै नमः” या “ॐ नमो भग्यवृद्धये नमः” मंत्र से 108 बार जाप करें।
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इसके बाद रोज़ाना या शुक्रवार को दीपक जलाकर पूजा करें।
कैसे स्थापित करें (सिद्धि विधि):
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दिन: शुक्रवार या रविवार को शुभ मुहूर्त में करें।
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स्थान: घर या ऑफिस के पूजा स्थान में रखें।
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सामग्री: स्वच्छ लाल कपड़ा, चंदन, धूप, दीप, फूल, और जल।
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विधि:
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स्नान के बाद शुद्ध होकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
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यंत्र को लाल कपड़े पर रखकर गंगाजल से शुद्ध करें।
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“ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्म्यै नमः” या “ॐ नमो भग्यवृद्धये नमः” मंत्र से 108 बार जाप करें।
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इसके बाद रोज़ाना या शुक्रवार को दीपक जलाकर पूजा करें।
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shuham chandrakar –
good Yantra